पड़ाव 1: योजना — किस विषय पर, किसके लिए?
ज़्यादातर किताबें लेखन की कमी से नहीं, योजना की कमी से असफल होती हैं। लिखना शुरू करने से पहले तीन सवालों के जवाब साफ होने चाहिए: यह किताब किसके लिए है, उन्हें इससे क्या मिलेगा, और बाज़ार में पहले से इस विषय पर क्या मौजूद है।
इस पड़ाव में क्या करें
- अपने पाठक को एक वाक्य में लिखें, जैसे “UPSC की तैयारी कर रहे हिंदी माध्यम के छात्र” या “पोते-पोतियों के लिए दादी की यादें”।
- विषय की मांग देखें: लोग इस विषय को कितना खोज और पढ़ रहे हैं, और रुचि बढ़ रही है या घट रही है।
- प्रतिस्पर्धा देखें: हिंदी में इस विषय पर कितनी किताबें हैं, कितनी पुरानी हैं, और किन प्रकाशकों की हैं।
- अपना अलग कोण तय करें: सरल भाषा, नया डेटा, स्थानीय उदाहरण या व्यक्तिगत अनुभव।
- प्रारूप चुनें: ई-बुक, पेपरबैक या दोनों। अनुमानित लंबाई (शब्द या पृष्ठ) भी तय करें।
इस पड़ाव के टूल्स
आम गलतियाँ
- “सबके लिए” लिखी गई किताब किसी तक नहीं पहुँचती।
- बिना देखे ऐसे विषय पर लिखना जिस पर दर्जनों ताज़ा किताबें पहले से हैं।
- लंबाई तय किए बिना लिखना शुरू करना, जिससे किताब कभी पूरी नहीं होती।
योजना के साथ (जल्द): पूरी बुक-प्लान रिपोर्ट: विषय की मांग, प्रतिस्पर्धी किताबों का विश्लेषण, अलग कोण के सुझाव और अध्याय-रूपरेखा। योजनाएँ देखें