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पड़ाव 1: योजना · आखिरी अपडेट: 4 अक्टूबर 2026

पहली किताब लिखने से पहले खुद से पूछें ये 10 सवाल

बहुत से लोग किताब लिखने का सपना सालों तक पालते हैं, और जब शुरू करते हैं तो कुछ अध्यायों के बाद रुक जाते हैं। ज़्यादातर मामलों में वजह लिखने की क्षमता नहीं, बल्कि शुरुआत में साफ योजना का न होना है। नीचे के दस सवालों के जवाब कागज़ पर लिख लें। यही आपकी किताब का नक्शा बनेंगे।

1. यह किताब किसके लिए है?

“सबके लिए” कोई जवाब नहीं है। अपने पाठक को एक वाक्य में लिखें, जैसे: “गाँव से शहर आए पहली पीढ़ी के नौकरीपेशा युवा” या “बोर्ड परीक्षा देने वाले हिंदी माध्यम के विद्यार्थी”। जितना साफ पाठक, उतनी साफ भाषा और उतना आसान प्रचार।

2. पाठक को इससे क्या मिलेगा?

ज्ञान की किताब में यह कोई समाधान या कौशल होगा, और कहानी या कविता में कोई अनुभव या भाव। इसे एक पंक्ति के वादे के रूप में लिखें। यही वादा आगे चलकर आपकी किताब का उपशीर्षक और ब्लर्ब बनेगा।

3. इस विषय में लोगों की रुचि कितनी है?

अनुमान की जगह आंकड़े देखें। हमारे विषय-मांग मीटर से पता चलता है कि पिछले 12 महीनों में लोग उस विषय को Wikipedia पर कितना पढ़ रहे हैं, और रुचि बढ़ रही है या घट रही है।

4. इस विषय पर पहले से क्या मौजूद है?

प्रतिस्पर्धा विश्लेषक से देखें कि हिंदी में इस विषय पर कितनी किताबें हैं और वे कितनी पुरानी हैं। अगर ज़्यादातर किताबें दस साल से पुरानी हैं, तो नई और ताज़ा किताब के लिए जगह है।

5. मेरी किताब अलग क्यों है?

आपका अनुभव, आपका क्षेत्र, आपकी भाषा या नया दृष्टिकोण, यही आपकी पहचान है। एक वाक्य में लिखें: “बाकी किताबों से अलग, मेरी किताब…”।

6. किताब कितनी लंबी होगी?

लक्ष्य तय करें। ज्ञान की छोटी किताब 15,000 से 30,000 शब्दों की, सामान्य किताब 40,000 से 60,000 शब्दों की, और कविता-संग्रह 50 से 100 कविताओं का हो सकता है। शब्द से पृष्ठ अनुमान से जानें कि इतने शब्दों से कितने पृष्ठ बनेंगे।

7. ई-बुक, पेपरबैक या दोनों?

ई-बुक सस्ती और जल्दी बनती है। पेपरबैक उपहार, कार्यक्रमों और ऑफ़लाइन पाठकों के लिए ज़रूरी है। शुरुआत ई-बुक से करके बाद में पेपरबैक लाना भी अच्छा रास्ता है।

8. रोज़ कितना समय दे सकता हूँ?

रोज़ 30 से 45 मिनट और 400 से 500 शब्द का लक्ष्य रखें, तो 40,000 शब्द की किताब का पहला ड्राफ्ट लगभग तीन महीने में तैयार हो जाता है।

9. बजट कितना है?

संपादन, कवर, फॉर्मेटिंग और प्रचार में कहाँ खुद काम करेंगे और कहाँ मदद लेंगे, यह पहले तय करें। आज बिना हज़ारों प्रतियाँ छपवाए भी प्रकाशन संभव है।

10. किताब छपने के बाद मैं क्या चाहता हूँ?

पहचान, आय, अपने व्यवसाय के लिए साख, या परिवार के लिए एक यादगार? लक्ष्य के हिसाब से कीमत, प्रचार और प्रकाशन का तरीका बदलता है।

इन दस जवाबों को एक पेज पर लिखकर अपनी मेज़ के पास रखें। लिखते समय जब भी भटकें, यही पेज रास्ता दिखाएगा।

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