पड़ाव 6: प्रकाशन · आखिरी अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
प्रिंट-ऑन-डिमांड क्या है? बिना हज़ार प्रतियाँ छपवाए पेपरबैक
पहले किताब छपवाने का मतलब था प्रेस में 500 या 1,000 प्रतियाँ छपवाना, उन्हें घर या गोदाम में रखना और खुद बेचना। प्रिंट-ऑन-डिमांड (POD) में किताब तभी छपती है जब कोई पाठक उसे ऑर्डर करता है, और सेवा-प्रदाता उसे सीधे पाठक तक भेज देता है।
यह कैसे काम करता है
- आप प्रिंट-रेडी PDF (भीतरी पृष्ठ) और पूरा कवर अपलोड करते हैं।
- सेवा किताब को ऑनलाइन स्टोर पर सूचीबद्ध करती है।
- पाठक ऑर्डर करता है, किताब छपती है और भेजी जाती है।
- कीमत में से छपाई लागत और सेवा/स्टोर का हिस्सा घटाकर बाकी आपकी रॉयल्टी होती है।
फायदे
- पहले से बड़ी रकम लगाने की ज़रूरत नहीं।
- कोई स्टॉक, गोदाम या डिलीवरी का झंझट नहीं।
- किताब कभी “आउट ऑफ़ स्टॉक” नहीं होती।
- गलती सुधारकर नई फाइल डालना आसान।
सीमाएँ
- प्रति-प्रति छपाई लागत बड़ी छपाई (ऑफ़सेट) से ज़्यादा होती है, इसलिए कीमत सोच-समझकर रखनी पड़ती है।
- कागज़, आकार और बाइंडिंग के विकल्प सीमित होते हैं।
- किताब-दुकानों तक पहुँच अपने-आप नहीं होती।
रॉयल्टी का गणित
मान लीजिए किताब की कीमत ₹299 है, सेवा की तय दर के बाद आपके हिस्से में कीमत का 60% आता है, और छपाई लागत ₹120 है। तब रॉयल्टी ≈ 0.6 × 299 − 120 = लगभग ₹59 प्रति प्रति। अपने आंकड़ों से हिसाब रॉयल्टी कैलकुलेटर में लगाएँ। हर सेवा का सूत्र अलग होता है, इसलिए उनकी शर्तों से मिलाएँ।
सेवा चुनने से पहले ये सवाल पूछें
- क्या किताब का कॉपीराइट पूरी तरह मेरे पास रहेगा? अनुबंध कब और कैसे खत्म कर सकता हूँ?
- छपाई लागत और रॉयल्टी का सूत्र क्या है? भुगतान कब और कैसे होगा?
- किन स्टोर पर किताब सूचीबद्ध होगी?
- ISBN किसके नाम से होगा, मेरे या सेवा के?
- लेखक-प्रतियाँ किस दर पर मिलेंगी?
- क्या “पैकेज” के नाम पर ऐसी सेवाएँ बेची जा रही हैं जिनकी मुझे ज़रूरत नहीं?