पड़ाव 6: प्रकाशन · आखिरी अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
भारत में ISBN कैसे लें: स्व-प्रकाशित लेखकों के लिए पूरी प्रक्रिया
ISBN (International Standard Book Number) किताब की 13 अंकों की अंतरराष्ट्रीय पहचान-संख्या है। भारत में ISBN राजा राममोहन राय राष्ट्रीय ISBN एजेंसी देती है, जो शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत है। आवेदन ऑनलाइन, isbn.gov.in पोर्टल पर होता है। लेखक अपनी किताब के लिए खुद “स्व-प्रकाशक” के रूप में आवेदन कर सकते हैं।
क्या ISBN ज़रूरी है?
हर जगह नहीं। कुछ ई-बुक प्लेटफ़ॉर्म बिना ISBN के भी किताब छापते हैं, और कई प्रिंट-ऑन-डिमांड सेवाएँ अपना ISBN दे देती हैं। लेकिन अपने नाम से ISBN लेने पर प्रकाशक के रूप में आपका नाम दर्ज होता है, और पुस्तकालयों, किताब-दुकानों और कुछ खरीदारों के लिए यह ज़रूरी होता है।
आवेदन के चरण (स्व-प्रकाशित लेखक)
- ISBN पोर्टल पर आवेदक के रूप में पंजीकरण करें और लॉगिन करें।
- अपना मूल विवरण भरें और दस्तावेज़ अपलोड करें। पंजीकरण की स्वीकृति में आमतौर पर कुछ कार्यदिवस लगते हैं।
- स्वीकृति के बाद नया ISBN अनुरोध बनाएँ। उपनाम या इम्प्रिंट हो तो जोड़ें।
- किताब का विवरण भरें: शीर्षक, लेखक, भाषा, विषय, प्रारूप आदि।
- ISBN जारी होने के बाद, किताब का कॉपीराइट पेज (टाइटल वर्सो) अपलोड करें।
ज़रूरी दस्तावेज़
एजेंसी की स्व-प्रकाशक गाइड के अनुसार मुख्य रूप से PAN कार्ड और पते का प्रमाण माँगा जाता है। आवेदन से पहले पोर्टल पर मौजूदा सूची ज़रूर देख लें, क्योंकि आवश्यकताएँ बदल सकती हैं।
तीन ज़रूरी नियम
- हर प्रारूप का अलग ISBN: ई-बुक, पेपरबैक और हार्डकवर, तीनों के ISBN अलग होंगे।
- नए संस्करण का नया ISBN: बड़े बदलाव वाले संशोधित संस्करण को नया ISBN चाहिए; छोटी त्रुटि-सुधार को नहीं।
- विवरण बदलना कठिन: एजेंसी की गाइड के अनुसार ISBN आवंटन के बाद विवरण नहीं बदला जा सकता। इसलिए शीर्षक, वर्तनी और लेखक का नाम पक्का करके ही आवेदन करें।
ISBN मिलने के बाद
ISBN जाँच व बारकोड टूल से ISBN की चेक-डिजिट जाँचें और बैक-कवर के लिए बारकोड बनाएँ। कॉपीराइट पेज में ISBN लिखें। उसका नमूना यहाँ देखें।