पड़ाव 4: कॉपीराइट · आखिरी अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
भारत में कॉपीराइट: लेखकों के लिए आसान गाइड
हर लेखक के मन में सवाल होता है: मेरी रचना पर मेरा अधिकार कैसे सुरक्षित रहेगा? भारत में यह विषय कॉपीराइट अधिनियम, 1957 से चलता है। नीचे इसकी मुख्य बातें सरल भाषा में हैं।
कॉपीराइट कब बनता है?
जैसे ही आप कोई मौलिक रचना लिखकर या रिकॉर्ड करके किसी ठोस रूप में लाते हैं, उस पर आपका कॉपीराइट अपने-आप बन जाता है। इसके लिए पंजीकरण अनिवार्य नहीं है।
किस चीज़ पर कॉपीराइट होता है, किस पर नहीं
- होता है: आपकी लिखी पूरी अभिव्यक्ति, जैसे कहानी, कविता, लेख, अनुवाद, चित्र, नक्शे।
- नहीं होता: केवल विचार, तथ्य, सामान्य जानकारी, और आमतौर पर छोटे शीर्षक। “गरीब किसान की कहानी” का विचार किसी का नहीं, लेकिन आपकी लिखी कहानी आपकी है।
कॉपीराइट कितने समय तक रहता है?
प्रकाशित साहित्यिक रचना पर कॉपीराइट लेखक के जीवनकाल भर, और उनकी मृत्यु के अगले कैलेंडर वर्ष से 60 वर्ष तक रहता है। उसके बाद रचना पब्लिक डोमेन में आ जाती है। किसी लेखक की स्थिति आप पब्लिक डोमेन जाँच से देख सकते हैं।
पंजीकरण क्यों कराएँ?
पंजीकरण ज़रूरी नहीं, लेकिन विवाद की स्थिति में यह मज़बूत प्रमाण का काम करता है। भारत में कॉपीराइट कार्यालय की वेबसाइट (copyright.gov.in) पर ऑनलाइन आवेदन होता है। आवेदन से पहले वहाँ की मौजूदा प्रक्रिया और शुल्क देख लें।
प्रकाशक या सेवा-प्रदाता के साथ अनुबंध
- पढ़ें कि अधिकार “सौंपे” (assign) जा रहे हैं या केवल “लाइसेंस” दिया जा रहा है।
- किन भाषाओं, देशों और प्रारूपों (ई-बुक, ऑडियो, अनुवाद) के अधिकार दिए जा रहे हैं।
- कितने समय के लिए, और अनुबंध कैसे खत्म होगा।
- रॉयल्टी का हिसाब कैसे और कितनी बार मिलेगा।
“उचित उपयोग” की छूट
कानून कुछ उद्देश्यों के लिए, जैसे समीक्षा, आलोचना, शोध और समाचार, किसी रचना के सीमित अंश के उपयोग की छूट देता है, बशर्ते स्रोत का उचित उल्लेख हो। यह छूट सीमित है। पूरी कविता या बड़े अंश उठाना इसमें नहीं आता।
अगर कोई आपकी रचना चुरा ले
- प्रमाण इकट्ठा करें: अपनी मूल फाइलें, प्रकाशन की तारीख, और नकल के स्क्रीनशॉट।
- ऑनलाइन स्टोर या प्लेटफ़ॉर्म पर कॉपीराइट शिकायत दर्ज करें।
- ज़रूरत हो तो वकील के ज़रिए नोटिस भेजें।