पड़ाव 3: लेखन · आखिरी अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
संपादन और प्रूफ़रीडिंग: हिंदी पांडुलिपि की पूरी चेकलिस्ट
पहला ड्राफ्ट पूरा होना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन किताब संपादन से बनती है। संपादन को तीन चरणों में करें: पहले बड़ी तस्वीर, फिर वाक्य, और आखिर में वर्तनी।
चरण 1: ढांचा (बड़ी तस्वीर)
- क्या हर अध्याय किताब के मुख्य वादे से जुड़ा है?
- क्या कोई हिस्सा दोहराव वाला या गैर-ज़रूरी है?
- क्या क्रम तर्कसंगत है? क्या किसी अध्याय को आगे-पीछे करना बेहतर होगा?
- क्या शुरुआत पाठक को बाँधती है और अंत संतोष देता है?
चरण 2: भाषा और वाक्य
- लंबे वाक्यों को तोड़ें। एक वाक्य में एक विचार।
- एक ही शब्द के बार-बार प्रयोग से बचें।
- पाठक के स्तर की भाषा रखें। कठिन शब्दों का अर्थ पहली बार में बताएँ।
- कर्मवाच्य (“किया गया”) की जगह कर्तृवाच्य (“हमने किया”) ज़्यादा सहज लगता है।
चरण 3: एकरूपता
हिंदी में एक ही शब्द की कई वर्तनियाँ चलती हैं। पूरी किताब में एक ही रूप रखें। अपनी पसंद की एक छोटी शैली-सूची बनाएँ:
| विषय | चुनें एक रूप |
|---|---|
| चंद्रबिंदु/अनुस्वार | हैं / हैँ, गई / गयी |
| नुक़्ता | ज़रूर / जरूर: एक ही रूप पूरी किताब में |
| अंक | 1, 2, 3 या १, २, ३ |
| अंग्रेज़ी शब्द | देवनागरी में (कंप्यूटर) या रोमन में (computer) |
| उद्धरण-चिह्न | “ ” या ' ' |
चरण 4: प्रूफ़रीडिंग
- मात्राएँ: ि/ी, ु/ू, े/ै की गलतियाँ।
- संयुक्ताक्षर: पुरानी KrutiDev फाइल से बदले टेक्स्ट में “र्”, “त्र”, “श्र” जैसे अक्षर ध्यान से देखें।
- विराम-चिह्न: पूर्ण विराम (।) से पहले खाली जगह न हो।
- नाम, तारीखें, आंकड़े और उद्धरण एक बार फिर स्रोत से मिलाएँ।
अपनी ही पांडुलिपि की गलतियाँ पकड़ना कठिन होता है, क्योंकि दिमाग वही पढ़ता है जो उसे पता है। किसी दूसरे व्यक्ति से प्रूफ़ पढ़वाएँ, या टेक्स्ट को ज़ोर से पढ़ें।