पड़ाव 5: रूप-सज्जा · आखिरी अपडेट: 4 अक्टूबर 2026
हिंदी किताब का भीतरी पृष्ठ-विन्यास: फॉन्ट, हाशिए और पंक्ति-अंतर
अच्छा पृष्ठ-विन्यास पाठक को दिखता नहीं, बस पढ़ना आसान लगता है। खराब विन्यास तुरंत खटकता है। देवनागरी में मात्राएँ ऊपर-नीचे जाती हैं, इसलिए अंग्रेज़ी किताबों से थोड़ा ज़्यादा पंक्ति-अंतर चाहिए।
छपी किताब के लिए शुरुआती मान
| चीज़ | सुझाव |
|---|---|
| फॉन्ट | Unicode देवनागरी फॉन्ट, जैसे Noto Serif Devanagari, Kokila, Mangal; शीर्षकों के लिए अलग फॉन्ट चल सकता है |
| मुख्य टेक्स्ट का आकार | 11 से 12 पॉइंट (बुज़ुर्ग पाठकों के लिए 13) |
| पंक्ति-अंतर | 1.3 से 1.5 |
| हाशिए | बाहर 0.6 से 0.75 इंच; भीतर (बाइंडिंग की तरफ़) 0.75 से 0.9 इंच, मोटी किताब में ज़्यादा |
| पैराग्राफ | या तो पहली पंक्ति में इंडेंट, या पैराग्राफ के बीच खाली जगह; दोनों नहीं |
| संरेखण | दोनों तरफ़ बराबर (justify), लेकिन शब्दों के बीच बहुत खाली जगह न बने |
किताब के पृष्ठों का क्रम
- शीर्षक-पृष्ठ
- कॉपीराइट पेज
- समर्पण (वैकल्पिक)
- अनुक्रमणिका
- भूमिका या प्रस्तावना
- मुख्य अध्याय
- परिशिष्ट, आभार, लेखक-परिचय
नए अध्याय दाईं ओर वाले पृष्ठ से शुरू करना पारंपरिक तरीका है।
ई-बुक के लिए अलग बातें
- ई-बुक का टेक्स्ट “बहता” (reflowable) है। पाठक फॉन्ट-आकार खुद बदलता है, इसलिए तय पृष्ठ-नंबर और हेडर-फुटर न रखें।
- शीर्षकों के लिए Word की “Heading” शैलियाँ इस्तेमाल करें, ताकि अपने-आप अनुक्रमणिका बने।
- खाली पंक्तियों से जगह बनाने की जगह “पेज ब्रेक” लगाएँ।
- टेक्स्ट Unicode में हो। पुरानी फाइल हो तो फॉन्ट परिवर्तक से बदलें।
अंतिम जाँच
PDF बनाकर हर पृष्ठ देखें: अकेली पंक्ति अगले पृष्ठ पर तो नहीं चली गई, मात्राएँ कटी तो नहीं, और संयुक्ताक्षर सही दिख रहे हैं या नहीं। प्रिंट के लिए फॉन्ट PDF में “embed” होने चाहिए।